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मिट्टी चिकित्सा

हमारा शरीर पञ्च तत्वों से मिल कर बना है जिसमे एक तत्व पृथ्वी तत्व भी है। मिटटी में पृथ्वी तत्व की प्रधानता पायी जाती है। मिटटी तत्व शरीर के सभी विजातीय द्रव्यों को बाहर निकाल सकने में समर्थ है। कीटाणुनाशक होने के साथ साथ यह एक महानतम औषधि है जो सर्व सुलभ है।


सूर्य रश्मि चिकित्सा

सूर्य के प्रकाश में सात रंग है। प्राकृतिक चिकित्सा में इन सातों रंगों से रोगी का उपचार किया जाता है। इस चिकित्सा के माध्यम से शरीर में उष्णता की वृद्धि होती है। जिससे स्नायु उत्तेजित होतें हैं। यह चिकित्सा विधि वात रोग, कफ, ज्‍वर, श्‍वास, कास, आमवात पक्षाघात, ह्रदयरोग, उदरमूल, मेढोरोग, वात जन्‍यरोग, शोध चर्मविकार, पित्‍तजन्‍य रोगों में प्रभावी हैं।


जल चिकित्सा

जल चिकित्सा का भी प्रकृति चिकित्सा पद्धति में बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। इसमें उष्ण जल शीत जल वाष्प जल आदि का प्रयोग किया जाता है। इस क्रिया के अन्तर्गत गर्म तौलिये से स्वेदन किया जाता है। वातजन्य रोग जैसे पक्षाघात, उदार रोग अम्ल पितादि में रोगी को कटि स्नान, टब स्नान , फुट बाथ, परिषेक, कुंजल और नेति आदि का प्रयोग किया जाता है।


उपवास

आपको यह जानकार आश्चर्य होगा लेकिन उपवास भी प्राकृतिक चिकित्सा का एक अंग है। इसका सभी पेट के रोग, श्वास, आमवात, सन्धिवात, त्वक विकार, मेदो वृद्धि आदि में विश्‍ोष उपयोग होता है। प्राकृतिक रूप में सेवन करने पर कई खाद्य पदार्थ अपने आप में एक दवा है|


रोग एवं प्राकृतिक उपचार

प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली चिकित्सा की एक रचनात्मक विधि है, जिसका लक्ष्य प्रकृति में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध तत्त्वों के उचित इस्तेमाल द्वारा रोग का मूल कारण समाप्त करना है। यह न केवल एक चिकित्सा पद्धति है बल्कि मानव शरीर में उपस्थित आंतरिक महत्त्वपूर्ण शक्तियों या प्राकृतिक तत्त्वों के अनुरूप एक जीवन-शैली है। यह जीवन कला तथा विज्ञान में एक संपूर्ण क्रांति है।


योग केन्द्र

"योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है यह दिमाग और शरीर की एकता का प्रतीक है; मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य है; विचार, संयम और पूर्ति प्रदान करने वाला है तथा स्वास्थ्य और भलाई के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को भी प्रदान करने वाला है। यह व्यायाम