"मिट्टी चिकित्सा" स्वास्थ्य मंदिर द्वारा संचालित सेवाएँ


मिट्टी चिकित्सा

मिट्टी में लगे पेड़ हमें मीठे आम व अमरूद पफल देते हैं। सचमुच कितनी शक्ति है मिट्टी में। मिट्टी से शरीर बनता है और अंत में मिट्टी में ही मिल जाता है। जो मिट्टी हमारे शरीर का निर्माण कर सकती है, वह हमारे रोगों को दूर भी कर सकती है। मिट्टी से असाध्य कहे जाने वाले भी कई रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाते हैं। मिट्टी की चिकित्सा साधरणतः पेडू की पट्टी, आंख, माथे और पेट की पट्टी तथा सारे शरीर पर मिट्टी का लेप करके की जाती है। मिट्टी की पट्टी बनाने के लिए सापफ सुथरी जगह से दो पफीट गहरे खोदकर मिट्टी लेनी चाहिए। गूंथे हुए आटे की तरह मिट्टी की मोटाई लगभग आध इंच तथा चैड़ाई नौ-दस इंच हो। अलग-अलग परिस्थितियों में पट्टी का आकार-प्रकार बदला जा सकता है। ठंडे मौसम में मिट्टी पट्टी लगाकर मोटे चादर या कंबल से ढक लेना चाहिए। बारह से चैबीस घंटे तक भीगी हुई मिट्टी काम में लायी जाती है। एक बार प्रयोग की गयी मिट्टी को दोबारा उपयोग में नहीं लाना चाहिए। गीली मिट्टी में मरीज को गले तक डुबाकर भी चिकित्सा की जाती है जो प्रायः एक घंटे के लिए किया जाता है। साफ-सुथरी मिट्टी ही प्रयोग में लानी चाहिए। पाचन तंत्रा के रोगों के लिए पेडू की पट्टी सर्वाध्कि उपयोगी है। कब्ज, ज्वर, गैस, पीलिया, पेशाब न होना आदि सभी रोगों में पेडू की पट्टी लगानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि गांधी जी भी नित्यप्रति मिट्टी की पट्टी का प्रयोग करते थे। चर्मरोगों एवं स्नायु विकारों में पूरे शरीर में मिट्टी का लेप लाभदायक है।