"जल चिकित्सा" स्वास्थ्य मंदिर द्वारा संचालित सेवाएँ


जल चिकित्सा

आयुर्वेद में जल (पानी) की कई रोगों के इलाज में उपयोगिता बताई गई है जो दुनिया भर में जल चिकित्सा के नाम से प्रचलित है। विदेशों में जल चिकित्सा को “Hydrotherapy” के नाम से जाना जाता है, जर्मनी के महान आचार्य सरलुईकूने ने जल के विभिन्न प्रयोगों द्वारा कई रोगों को सफलतापूर्वक दूर किया। आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धतियों में इसकी काफी महत्ता बताई गई है। अब तो इसे एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के रूप में भी अपनाया जा रहा है। जापान में जल चिकित्सा पद्धति काफी लोकप्रिय हैं तथा अनेक रोगों का उपचार इससे किया जा रहा है। भारत में भी फिर से यह पद्धति धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रही है।  जल चिकित्सा की कई विधियां हैं। ठंडे पानी की पट्टी, गर्म पानी की पट्टी, जल धौती, एनिमा, वाष्प स्नान, कटि स्नान, टब स्नान, बर्फ आदि विधियों से विभिन्न रोगों में लाभ होता है।  दर्द, सूजन, फोड़े-फुसी गर्म-ठंडे पानी से सेकने पर ठीक हो जाते हैं। पहले तीन मिनट गर्म पानी की सेंक करें, फिर एक मिनट ठंडे पानी की। इस प्रकार दस मिनट तक सुबह-शाम दो बार सेंकने से जरुर लाभ मिलता है।  जब तनाव की स्थिति से गुजर रहे हों तो एक गिलास ठंडा पानी पिएँ। यह आपकी एनर्जी को बढ़ाता है।  जल चिकित्सा से भगाए तनाव को– तनाव को भाप स्नान से दूर किया जा सकता है। घर पर वाष्प स्नान लेने के लिए एक कुरसी पर रोगी को बैठा दें। उसको कंबल से चारों तरफ से ढक दें। दूर गैस चूल्हे पर एक कुकर पानी भरकर रखें। सीटी को हटाकर एक लंबी पाइप लगा दें। पाइप के एक सिरे को सावधानीपूर्वक रोगी की कुर्सी के नीचे रख दें। इससे पहले रोगी को एक गिलास पानी पिलाएँ और सिर पर ठंडे पानी से भीगा तौलिया रखें। भाप स्नान से त्वचा का मैल निकल जाता है। शरीर के रोम छिद्र खुल जाते हैं। शरीर में हल्कापन आता है। त्वचा निखरती है। तनाव कम हो जाता है। भाप स्नान से कमर दर्द में भी फायदा मिलता है। सावधानियाँ : उच्च रक्तचाप की तकलीफ है तो भाप स्नान न करें। अगर गर्मी सहन न हो तो उपचार तुरंत रोक दें।  पेट में यदि दर्द हो रहा हो तो गर्म पानी की पट्टी या रबर की बोतल में गर्म पानी भर उसका सेंक करने से पेट दर्द दूर हो जाता है। अकसर पेट-दर्द गलत खान-पान से होता है जिससे पेट में गैस बनती है और गैस मरोड़ पैदा करती है। इसके लिए एनीमा लेना भी लाभप्रद है। एनीमा से पेट का जमा हुआ मल या गैस आदि बाहर निकल जाते हैं।  पैरों में पसीना आने की बीमारी हो, तो पहले गर्म पानी में और फिर ठंडे पानी में क्रमश: पांच-पांच मिनट पैर रखने चाहिए। फिर बाद में रगड़कर पोंछ लें और यह प्रयोग कम-से-कम हफ्ते भर करें। जल चिकित्सा के इस उपाय से अन्य शारीरिक विकारों को भी दूर किया जा सकता है।  पाचन क्रिया दुरुस्त रखने के लिए जल चिकित्सा : इसके लिए कमर स्नान काफी फायदेमंद होता है। बड़े टब में पानी भरें। रोगी को टब में कपड़े उतारकर इस तरह बैठा दें कि उसकी नाभि तक पानी आ जाए। रोगी के पैर बाहर एक मेज पर रख दें। रोगी के सिर पर एक गीला तौलिया रख दें तथा रोगी को एक सूती कपड़ा देकर नाभि के चारों तरफ रगड़ने को कहें। यह जल चिकित्सा 20 से 30 मिनट तक दें। इससे कब्ज में लाभ मिलता है और पाचन क्रिया ठीक हो जाती है।  दमा के दौरे में हाथ-पैर गर्म पानी में डुबोएं और रात में सोने से पूर्व गर्म पानी पिलाएं। दौरा पड़ने पर भी गर्म पानी ही पिलाना लाभप्रद होता है।  गर्मी में ठंडे पानी से और सर्दी में गर्म पानी से पैर धोकर सोने से नींद अच्छी आती है।  ज्यादा चलने, ऊंचाई पर चढ़ने आदि से पैरों में आई थकान को दूर करने के लिए शाम को गर्म पानी में थोड़ा नमक डालकर पांच-दस मिनट डुबो कर रखें, सारी थकान दूर हो जाएगी।